फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग (34) ने डेटा लीक (कैंब्रिज एनालिटिका) विवाद सामने आने के बाद सीओओ शेरिल सैंडबर्ग (49) से नाराज थे। उन्होंने कंपनी के विवादों और उनके सही तरीके से निपटारा नहीं करने के लिए शेरिल को जिम्मेदार ठहराया था। उसके बाद शेरिल को नौकरी की चिंता सताने लगी थी। उन्होंने अपने दोस्तों के इसका जिक्र किया था। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में सोमवार को यह जानकारी दी गई।
जकरबर्ग के मुताबिक विवाद से निपटने में शेरिल नाकाम रहीं: रिपोर्ट
जकरबर्ग का मानना था कि डेटा लीक विवाद के बाद जनता के गुस्से से निपटने के लिए शेरिल को प्रभावी तरीके से काम करना चाहिए था। उन्हें फेसबुक के कंटेंट की मॉनिटरिंग के लिए आक्रामक स्ट्रैटजी अपनानी चाहिए थी।
इस साल मार्च में एफबी का डेटा लीक विवाद सामने आया था। इसके बाद फेसबुक की ओर से जवाब देने के लिए शेरिल अमेरिकी संसद में पेश हुई थीं और मीडिया को इंटरव्यू दिए थे।
अप्रैल में ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में शेरिल ने कहा था कि वो डेटा लीक विवाद के लिए निजी तौर पर जिम्मेदार हैं। क्योंकि, कई गलतियां हुई थीं। जबकि, उनके बयान से एक दिन पहले जकरबर्ग ने खुद को जिम्मेदार बताया था। शेरिल साल 2008 से फेसबुक की सीओओ हैं।
ब्रिटिश एनालिसिस फर्म कैंब्रिज एनालिटिका ने फेसबुक के 8.7 करोड़ यूजर का डेटा हासिल किया था। फेसबुक ने यह जानकारी छिपाई थी। इस विवाद से दुनियाभर में फेसबुक की छवि खराब हुई। उसके यूजर की संख्या घटी और कंपनी के शेयर में तेज गिरावट आ गई थी।
कैंब्रिज एनालिटिका मामले में ब्रिटेन के सूचना आयुक्त ने फेसबुक पर करीब 5 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था। कंपनी के सीईओ जकरबर्ग को अमेरिकी सांसदों के सवालों का सामना भी करना पड़ा था।
फेसबुक ने पीआर फर्म डिफायनर्स से कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया है। कंपनी के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने गुरुवार को इसका ऐलान किया। सीएनएन के मुताबिक जकरबर्ग ने कहा कि उन्हें न्यूयॉर्क टाइम्स (एनवाईटी) के आर्टिकल के जरिए ही यह पता चला कि उनकी कंपनी डिफायनर्स के साथ काम कर रही है। जकरबर्ग बोले, "पता चलते ही मैंने अपनी टीम से फोन पर बात की और अब हम डिफायनर्स के साथ काम नहीं कर रहे हैं।" जकरबर्ग का कहना है कि यह पता लगाया जाएगा कि उनकी कंपनी ने डिफायनर्स जैसी किसी और फर्म के साथ तो काम नहीं किया।
डिफायनर्स ने एपल, गूगल के खिलाफ आर्टिकल लिखे: रिपोर्ट
एनवाईटी की रिपोर्ट में बुधवार को कहा गया था कि एपल और गूगल के खिलाफ लिखने के लिए फेसबुक ने अमेरिकी पीआर फर्म डिफायनर्स पब्लिक अफेयर्स से कॉन्ट्रैक्ट किया था। डिफानर्स ने फेसबुक के विवादों पर पर्दा डाला था। रिपोर्ट के मुताबिक जकरबर्ग ने अपने कर्मचारियों से आईफोन का इस्तेमाल नहीं करने के लिए भी कहा है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया कि एफबी ने डिफायनर्स के जरिए यह बात फैलाई कि एंटी फेसबुक मूवमेंट बढ़ने के पीछे निवेशक और सामाजिक कार्यकर्ता जॉर्ज सोरोस का हाथ था। इस पर जकरबर्ग का कहना है कि वो सोरोस का सम्मान करते हैं।
डिफायनर्स से संबंध मीडिया तक सीमित थे: फेसबुक
फेसबुक ने न्यूयॉर्क टाइम्स के इस दावे को गलत बताया कि उसने अपनी तरफ से डिफायनर्स से आर्टिकल लिखवाए। उसका कहना है कि डिफायनर्स से संबंध सिर्फ मीडिया तक सीमित थे। डिफायनर्स ने कंपनी के लिए कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी।
Tuesday, November 20, 2018
Thursday, November 8, 2018
K9 वज्र और M777 होवित्जर तोपें सेना में हुई शामिल, बढ़ेगी ताकत
बोफोर्स तोप के बाद भारतीय सेना में आज M777 तोपों को शामिल कर लिया गया है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और आर्मी चीफ बिपिन रावत की मौजूदगी में इसे सेना में शामिल किया गया। पाकिस्तान और चीन की चुनौती को देखते हुए होवित्जर तोपों का सेना में शामिल होना काफी अहम माना जा रहा है।
बोफोर्स तोप के बाद भारतीय सेना में तीन दशक लंबा इंतजार आज खत्म होने हो गया है। K9 वज्र और M777 होवित्जर तोपों के शामिल होने से सेना की ताकत और बढ़ गई। पाकिस्तान और चीन सीमा पर बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए इन तोपों की महत्ता बढ़ जाती है। करगिल युद्ध के समय भी काफी ऊंचाई पर बैठे दुश्मनों को निशाना बनाने के लिए ज्यादा दमदार तोपों की जरूरत महसूस की गई थी।
निर्मला सीतारमण नासिक के देवलाली तोपखाने केंद्र पर ‘K9 वज्र और M777 होवित्जर' तोपों को शामिल करने के लिए आयोजित कार्यक्रम में मौजूद थीं। रक्षा मंत्री ने आज सुबह ट्वीट कर कहा था कि आज 155 mm M777 A2 अल्ट्रा लाइट होवित्जर आधुनिक गन सिस्टम्स को सेना में शामिल किया जाएगा। इस मीडियम तोप को आसानी से दुर्गम पहाड़ी इलाकों में भी तैनात किया जा सकता है।
देवलाली में आयोजित समारोह में आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत समेत कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी शामिल हुए थे। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने बताया कि K9 वज्र को 4,366 करोड़ रुपये की लागत से शामिल किया गया है। यह कार्य नवंबर 2020 तक पूरा होगा। कुल 100 तोपों में से 10 तोपों की पहली खेप की आपूर्ति इस महीने की जाएगी।
K9 की खासियत
इस तोप की रेंज 28-38 किमी है। यह 30 सेकंड में तीन गोले दागने में सक्षम है। तीन मिनट में यह तोप 15 गोले दाग सकती है। 40 K9 वज्र तोपें नवंबर 2019 में और बाकी 50 तोपों की आपूर्ति नवंबर 2020 में की जाएगी। K9 वज्र की प्रथम रेजिमेंट जुलाई 2019 तक पूरी होने की उम्मीद है। यह पहली ऐसी तोप है जिसे भारतीय प्राइवेट सेक्टर ने बनाया है।
दमदार M777 होवित्जर तोप
यह दमदार तोप 30 किमी की दूरी तक वार कर सकती है। इसे हेलिकॉप्टर या प्लेन के जरिए आवश्यकतानुसार जगह पर ले जाया जा सकता है।थल सेना M777 होवित्जर की सात रेजिमेंट बनाने जा रही है। इस समय 52 कैलिबर की M777 तोप का इस्तेमाल अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया कर रहे हैं और अब भारत की सेना भी करेगी। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक सेना को इन तोपों की आपूर्ति अगस्त 2019 से शुरू हो जाएगी और यह पूरी प्रक्रिया 24 महीने में पूरी होगी। प्रथम रेजिमेंट अगले साल अक्टूबर तक पूरी होगी।
बोफोर्स तोप के बाद भारतीय सेना में तीन दशक लंबा इंतजार आज खत्म होने हो गया है। K9 वज्र और M777 होवित्जर तोपों के शामिल होने से सेना की ताकत और बढ़ गई। पाकिस्तान और चीन सीमा पर बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए इन तोपों की महत्ता बढ़ जाती है। करगिल युद्ध के समय भी काफी ऊंचाई पर बैठे दुश्मनों को निशाना बनाने के लिए ज्यादा दमदार तोपों की जरूरत महसूस की गई थी।
निर्मला सीतारमण नासिक के देवलाली तोपखाने केंद्र पर ‘K9 वज्र और M777 होवित्जर' तोपों को शामिल करने के लिए आयोजित कार्यक्रम में मौजूद थीं। रक्षा मंत्री ने आज सुबह ट्वीट कर कहा था कि आज 155 mm M777 A2 अल्ट्रा लाइट होवित्जर आधुनिक गन सिस्टम्स को सेना में शामिल किया जाएगा। इस मीडियम तोप को आसानी से दुर्गम पहाड़ी इलाकों में भी तैनात किया जा सकता है।
देवलाली में आयोजित समारोह में आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत समेत कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी शामिल हुए थे। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने बताया कि K9 वज्र को 4,366 करोड़ रुपये की लागत से शामिल किया गया है। यह कार्य नवंबर 2020 तक पूरा होगा। कुल 100 तोपों में से 10 तोपों की पहली खेप की आपूर्ति इस महीने की जाएगी।
K9 की खासियत
इस तोप की रेंज 28-38 किमी है। यह 30 सेकंड में तीन गोले दागने में सक्षम है। तीन मिनट में यह तोप 15 गोले दाग सकती है। 40 K9 वज्र तोपें नवंबर 2019 में और बाकी 50 तोपों की आपूर्ति नवंबर 2020 में की जाएगी। K9 वज्र की प्रथम रेजिमेंट जुलाई 2019 तक पूरी होने की उम्मीद है। यह पहली ऐसी तोप है जिसे भारतीय प्राइवेट सेक्टर ने बनाया है।
दमदार M777 होवित्जर तोप
यह दमदार तोप 30 किमी की दूरी तक वार कर सकती है। इसे हेलिकॉप्टर या प्लेन के जरिए आवश्यकतानुसार जगह पर ले जाया जा सकता है।थल सेना M777 होवित्जर की सात रेजिमेंट बनाने जा रही है। इस समय 52 कैलिबर की M777 तोप का इस्तेमाल अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया कर रहे हैं और अब भारत की सेना भी करेगी। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक सेना को इन तोपों की आपूर्ति अगस्त 2019 से शुरू हो जाएगी और यह पूरी प्रक्रिया 24 महीने में पूरी होगी। प्रथम रेजिमेंट अगले साल अक्टूबर तक पूरी होगी।
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