Tuesday, January 28, 2020

हमें दूसरे देशों के क़ानूनों का सम्मान करना चाहिए: ओम बिरला

यूरोपीय संघ की संसद में जम्मू कश्मीर और नागरिकता संशोधन क़ानून के संबंध में प्रस्ताव पेश किए जाने की लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से कड़ी निंदा की है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उन्होंने कहा है, "इंटर पार्लियामेन्टरी यूनियन के सदस्य होने के नाते हमें क़ानून बनाने की गणतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए."

इससे पहले भारतीय उप राष्ट्रपति वैंकया नायडू ने कहा था कि, "ये भारत का अंदरूनी मसला है और उसमें इसमें बाहर से कोई दखलंदाज़ी नहीं होनी चाहिए."

यूरोपीय संघ की संसद के कुल 751 सदस्यों में से क़रीब 626 सदस्यों ने नागरिकता संशोधन क़ानून और जम्मू कश्मीर के मसले पर विचार करने के लिए छह प्रस्ताव सदस्यों के सामने रखे हैं.

प्रस्ताव के अनुसार, "भारत सरकार एनआरसी लागू करने जा रही है जिसके तहत भारत के 1.3 अरब से अधिक लोगों की नागरिकता से संबंधित दस्तावेज़ इकट्ठे किए जाएंगे. हाल में असम में एनआरसी का काम पूरा किया गया है जिसके बाद यहां 19 लाख लोगों को 'अवैध प्रवासी' करार दिया गया है. और अब इन्हें या तो नए बनाए गए डिटेन्शन सेंटरों में रखा जाएगा या फिर देश से बाहर निकाला जाएगा."

अगली पंक्ति में लिखा है, "भारतीय सरकार खुद को धर्मनिरपेक्ष कहती है, लेकिन ताज़ा किए गए संशोधन के अनुसार एनआरसी में मुसलमानों को अलग-थलग किया जाएगा."

आगे कहा गया है कि सदस्यों को चिंता है कि नागरिकता निर्धारित करने का ये एक ख़तरनाक तरीका है जिस कारण विश्व के सामने सबसे बड़ प्रवासी संकट खड़ा हो सकता है.

माना जा रहा है कि इसी साल मार्च में होने वाले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ब्रसेल्स दौरे से पहले पेश किया गया ये प्रस्ताव यूरोपीय यूनियन के देशों के साथ भारत के संबंधों पर असर डाल सकता है.

इनमें से एक प्रस्ताव 29 जनवरी को पेश हो सकता है जबकि एक अन्य प्रस्ताव पर 30 जनवरी को पेश किया जाएगा.

CAA और NRC के ख़िलाफ़ एक विरोध प्रदर्शन में कथित भड़काऊ भाषण देकर चर्चा में आए शरजील इमाम को जेएनयू प्रशासन ने समिति के सामने पेश होने के लिए कहा है.

जेएनयू के चीफ़ प्रोक्टर ने उन्हें 3 फरवरी से पहले प्रोक्टोरियल समिति के सामने पेश होने और उनके ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर के संबंध में सफाई देने के लिए कहा है.

शरजील पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और असम में देशद्रोह और दंगा भड़काने की धाराओं के तहत एफ़आईआर दर्ज किए गए हैं.

उनकी तलाश में दिल्ली और अलीगढ़ पुलिस के अलावा बिहार पुलिस की टीम भी लगी है क्योंकि उनका पैतृक घर बिहार के जहानाबाद ज़िले में है.

शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों ने शरजील के भाषण से ख़ुद को अलग कर लिया है.

शरजील ने आईआईटी रुड़की से इंजीनियरिंग की है.

फिलहाल वो जेएनयू के स्कूल ऑफ़ सोशल साइन्सेस के सेंटर ऑफ़ हिस्टॉरिकल स्टडीज़ में पीएचडी कर रहे हैं.

दिल्ली के बहुचर्चित निर्भया मामले में दोषी ठहराए गए लोगों में से एक मुकेश सिंह की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार दोपहर 12:30 बजे सुनवाई करेगा.

मुकेश सिंह की दया याचिका राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ख़ारिज कर दी थी. मुकेश सिंह ने इसी के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल की है.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अगर किसी को एक फरवरी को फाँसी दी जानी है, तो ये मामला प्राथमिकता का है.

निर्भया गैंगरेप मामले में दोषी ठहराए गए मुकेश सिंह, विनय शर्मा, अक्षय सिंह और पवन गुप्ता को एक फरवरी को फाँसी दी जानी है.

पहले इन चारों को 22 जनवरी को फाँसी दी जानी थी, लेकिन मुकेश सिंह ने दया याचिका राष्ट्रपति के पास भेज दी.

लेकिन दया याचिका ख़ारिज होने के बाद फाँसी की नई तारीख़ की घोषणा हुई.

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